श्री बगलामुखी पूजन एवं हवन की सम्पूर्ण पंडित-पाठ विधि

श्री बगलामुखी पूजन एवं हवन सम्पूर्ण विधि | DRISHTIVASTU.IN
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श्री बगलामुखी पूजन एवं हवन
सम्पूर्ण विधि एवं मंत्र-पाठ

संकल्प • ध्यान • आवाहन • षोडशोपचार पूजन • मंत्र-जप • हवन • पूर्णाहुति

ॐ ह्लीं

॥ श्री माँ बगलामुख्यै नमः ॥

माँ बगलामुखी की श्रद्धापूर्वक पूजा एवं हवन के लिए क्रमबद्ध सामान्य पूजन-पद्धति।

पंडित एवं साधक के लिए महत्वपूर्ण सूचना: यह पाठ सामान्य सात्त्विक पूजन एवं हवन के लिए व्यवस्थित किया गया है। दीक्षा-विशिष्ट तांत्रिक न्यास, पुरश्चरण, विशेष अनुष्ठान तथा उग्र प्रयोग अपने गुरु अथवा संबंधित परंपरा के निर्देशानुसार ही करें। विभिन्न सम्प्रदायों में मंत्र, विनियोग एवं पूजन-क्रम में पाठभेद संभव है।

1. पूजन एवं हवन सामग्री

पूजन सामग्री हवन सामग्री
पीला वस्त्र, पीला आसन, माँ बगलामुखी का चित्र/विग्रह, कलश, नारियल, मौली, अक्षत, हल्दी, कुमकुम, चंदन, पीले पुष्प, धूप, दीप, घृत, नैवेद्य, फल, पंचामृत। हवन कुण्ड, समिधा, शुद्ध घृत, सामान्य हवन सामग्री, पीले पुष्प/अक्षत तथा परंपरा अनुसार उपयुक्त सामग्री।

2. प्रारम्भिक शुद्धिकरण

विधि: पूजा स्थान को स्वच्छ करें। स्वयं स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पीले आसन पर बैठकर पूर्व अथवा उत्तराभिमुख होकर पूजा प्रारम्भ करें।

पवित्रीकरण

ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा ।
यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः ॥

ॐ पुण्डरीकाक्षाय नमः ॥
विधि: दाहिने हाथ में जल लेकर अपने ऊपर तथा पूजन सामग्री पर हल्का जल छिड़कें।

3. आचमन

विधि: दाहिने हाथ में थोड़ा जल लेकर निम्न मंत्रों के साथ तीन बार आचमन करें।
ॐ केशवाय स्वाहा ।
ॐ नारायणाय स्वाहा ।
ॐ माधवाय स्वाहा ॥

इसके बाद हाथ धोकर पुनः आसन पर स्थिर बैठें।

4. प्राणायाम एवं मनःशुद्धि

विधि: कुछ क्षण शांत बैठें। श्वास को सहज रखते हुए मन को एकाग्र करें। जबरदस्ती श्वास रोकने का प्रयास न करें।
ॐ भूः । ॐ भुवः । ॐ स्वः । ॐ महः । ॐ जनः । ॐ तपः । ॐ सत्यम् ।

ॐ तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि ।
धियो यो नः प्रचोदयात् ॥

5. दीप प्रज्वलन

विधि: घृत अथवा तिल/अन्य परंपरागत तेल का दीपक प्रज्वलित करें।
ॐ दीपज्योतिः परं ब्रह्म दीपज्योतिर्जनार्दनः ।
दीपो हरतु मे पापं दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते ॥

6. श्री गणेश पूजन

विधि: गणेश जी का ध्यान करके पुष्प एवं अक्षत अर्पित करें।
ॐ गं गणपतये नमः ॥

इसके पश्चात गंध, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप एवं नैवेद्य अर्पित करें।

7. गुरु एवं इष्टदेव स्मरण

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः ।
गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥
विधि: अपने गुरु, कुलदेवता एवं इष्टदेव का स्मरण करके पूजन की निर्विघ्न पूर्णता की प्रार्थना करें।

8. संकल्प विधि

विधि: दाहिने हाथ में जल, अक्षत एवं पुष्प लेकर अपना नाम, गोत्र, स्थान तथा पूजा का उद्देश्य बोलें।
ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः ।

ममोपात्तसमस्तदुरितक्षयद्वारा श्रीपरमेश्वरप्रीत्यर्थं
श्रीबगलामुखीदेव्याः प्रीत्यर्थं
यथाशक्ति पूजनं करिष्ये ।

सर्वबाधाशान्तिपूर्वकं सर्वमङ्गलप्राप्त्यर्थं सद्बुद्धिविवेकवैराग्यप्राप्त्यर्थं
श्रीबगलामुखीदेवीपूजनं हवनं च करिष्ये ॥
नोट: संकल्प में तिथि, वार, मास, पक्ष, गोत्र, नाम और स्थान पंडित जी वास्तविक पंचांग एवं यजमान की जानकारी के अनुसार जोड़ें।

9. कलश स्थापना एवं पूजन

विधि: कलश में शुद्ध जल भरें। उसमें अक्षत, पुष्प तथा परंपरा अनुसार गंध आदि डालें। कलश पर मौली बांधें और ऊपर नारियल स्थापित करें।
ॐ कलशस्य मुखे विष्णुः कण्ठे रुद्रः समाश्रितः ।
मूले तत्र स्थितो ब्रह्मा मध्ये मातृगणाः स्मृताः ॥
कुक्षौ तु सागराः सर्वे सप्तद्वीपा वसुन्धरा ।
ऋग्वेदोऽथ यजुर्वेदः सामवेदो ह्यथर्वणः ॥
अङ्गैश्च सहिताः सर्वे कलशाम्बु समाश्रिताः ॥

कलश को प्रणाम करके अक्षत एवं पुष्प अर्पित करें।

10. श्री बगलामुखी देवी का ध्यान

विधि: दोनों हाथ जोड़कर माँ बगलामुखी के स्वरूप का ध्यान करें। पीतवर्ण, पीताम्बर एवं दिव्य तेज से सुशोभित देवी का ध्यान एकाग्रचित्त होकर करें।
मध्ये सुधाब्धिमणिमण्डपरत्नवेदी-
सिंहासनोपरिगतां परिवीतवर्णाम् ।
पीताम्बराभरणमाल्यविभूषिताङ्गीं
देवीं नमामि धृतमुद्गरवैरिजिह्वाम् ॥ १॥

जिह्वाग्रमादाय करेण देवीं
वामेन शत्रून्परिपीडयन्तीम् ।
गदाभिघातेन च दक्षिणेन
पीताम्बराढ्यां द्विभुजां नमामि ॥ २॥

11. श्री बगलामुखी देवी का आवाहन

विधि: पुष्प एवं अक्षत हाथ में लेकर देवी का आवाहन करें।
ॐ ह्लीं श्रीबगलामुख्यै नमः ।
आवाहयामि स्थापयामि पूजयामि नमः ॥

पुष्प देवी के चरणों में अर्पित करें।

12. श्री बगलामुखी षोडशोपचार पूजन

① आसन

ॐ ह्लीं बगलामुख्यै नमः ।
आसनं समर्पयामि ॥

② पाद्य

ॐ ह्लीं बगलामुख्यै नमः ।
पाद्यं समर्पयामि ॥

③ अर्घ्य

ॐ ह्लीं बगलामुख्यै नमः ।
अर्घ्यं समर्पयामि ॥

④ आचमन

ॐ ह्लीं बगलामुख्यै नमः ।
आचमनीयं समर्पयामि ॥

⑤ स्नान

ॐ ह्लीं बगलामुख्यै नमः ।
स्नानं समर्पयामि ॥

⑥ वस्त्र

ॐ ह्लीं बगलामुख्यै नमः ।
वस्त्रं समर्पयामि ॥

⑦ गन्ध

ॐ ह्लीं बगलामुख्यै नमः ।
गन्धं समर्पयामि ॥

⑧ अक्षत

ॐ ह्लीं बगलामुख्यै नमः ।
अक्षतान् समर्पयामि ॥

⑨ पुष्प

ॐ ह्लीं बगलामुख्यै नमः ।
पुष्पाणि समर्पयामि ॥

⑩ धूप

ॐ ह्लीं बगलामुख्यै नमः ।
धूपमाघ्रापयामि ॥

⑪ दीप

ॐ ह्लीं बगलामुख्यै नमः ।
दीपं दर्शयामि ॥

⑫ नैवेद्य

ॐ ह्लीं बगलामुख्यै नमः ।
नैवेद्यं निवेदयामि ॥

⑬ आचमन

ॐ ह्लीं बगलामुख्यै नमः ।
आचमनीयं समर्पयामि ॥

⑭ ताम्बूल

ॐ ह्लीं बगलामुख्यै नमः ।
ताम्बूलं समर्पयामि ॥

⑮ दक्षिणा

ॐ ह्लीं बगलामुख्यै नमः ।
दक्षिणां समर्पयामि ॥

⑯ नमस्कार

ॐ ह्लीं बगलामुख्यै नमः ।
नमस्कारान् समर्पयामि ॥

13. श्री बगलामुखी मूल मंत्र-जप

विधि: माँ का ध्यान करके गुरु-परंपरा में स्वीकृत मंत्र का जप करें। दीक्षा प्राप्त साधक अपने गुरु से प्राप्त पाठ को ही प्राथमिकता दें।
ॐ ह्लीं बगलामुखि
सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय
जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय
ह्लीं ॐ स्वाहा ॥

जप-संख्या यजमान की पूजा-पद्धति एवं गुरु-परंपरा के अनुसार निर्धारित करें। सामान्य पूजा में अल्प जप रखा जा सकता है; विशेष अनुष्ठान में संख्या गुरु द्वारा निर्धारित की जानी चाहिए।

14. हवन की तैयारी

  1. हवन कुण्ड को स्वच्छ एवं सुरक्षित स्थान पर स्थापित करें।
  2. कुण्ड के चारों ओर पर्याप्त खुला स्थान रखें।
  3. समिधा व्यवस्थित करें।
  4. शुद्ध घृत एवं हवन सामग्री तैयार रखें।
  5. अग्नि को सुरक्षित रूप से प्रज्वलित करें।
अग्नि-सुरक्षा: हवन हमेशा वेंटिलेशन वाले स्थान पर करें। बच्चों एवं ज्वलनशील वस्तुओं को अग्नि से दूर रखें। हवन सामग्री कम मात्रा में डालें ताकि अग्नि अनियंत्रित न हो।

15. अग्नि प्रज्वलन एवं अग्नि पूजन

विधि: समिधा से अग्नि प्रज्वलित करें। घृत की अल्प मात्रा अर्पित करते हुए अग्निदेव का स्मरण करें।
ॐ अग्नये नमः ॥

ॐ सोमाय नमः ॥

ॐ अग्नीषोमाभ्यां नमः ॥

इसके बाद हवन की मुख्य प्रक्रिया प्रारम्भ करें।

16. श्री बगलामुखी हवन विधि

आहुति देने की विधि: मंत्र का उच्चारण करते हुए हवन सामग्री एवं घृत की अल्प मात्रा अग्नि में अर्पित करें। प्रत्येक पूर्ण मंत्र के अंत में "स्वाहा" के उच्चारण पर आहुति दें।
ॐ ह्लीं बगलामुखि
सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय
जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय
ह्लीं ॐ स्वाहा ॥
आहुति: उपरोक्त मंत्र के अंत में "स्वाहा" बोलते हुए घृत-मिश्रित उपयुक्त हवन सामग्री अग्नि में अर्पित करें।

आहुति-संख्या संकल्प, पूजा-पद्धति तथा गुरु-परंपरा के अनुसार रखें। दीक्षा-विशिष्ट पुरश्चरण या विशेष हवन में निर्धारित संख्या का पालन करें।

17. मंगल एवं सर्वबाधा-शमन प्रार्थना

मुख्य हवन के पश्चात सात्त्विक मंगलकामना के लिए निम्न मंत्र से आहुति दी जा सकती है।

ॐ ह्लीं बगलामुख्यै नमः स्वाहा ॥
प्रार्थना: यजमान एवं परिवार के आरोग्य, सद्बुद्धि, शांति, धर्म एवं मंगल की कामना करें।

18. स्विष्टकृत् आहुति

विधि: पूजन या हवन में हुई ज्ञात-अज्ञात त्रुटियों की शान्ति के लिए स्विष्टकृत् आहुति दी जाती है।
ॐ यदस्य कर्मणोऽत्यरीरिचं
यद्वा न्यूनमिहाकृतम् ।
अग्निष्टत्स्विष्टकृद्विद्वान्
सर्वं स्विष्टं सुहुतं करोतु ।
अग्नये स्विष्टकृते स्वाहा ॥

19. पूर्णाहुति

विधि: पूर्णाहुति के लिए परंपरा अनुसार नारियल/हवन सामग्री/घृत आदि का प्रयोग करें। सामग्री अग्नि में अर्पित करते समय यजमान एवं परिवार मंगल की भावना रखें।
ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते ।
पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ॥
ॐ पूर्णाहुतिं समर्पयामि स्वाहा ॥

20. माँ बगलामुखी से प्रार्थना

हे मातः बगलामुखि!
सर्वेषां मङ्गलं कुरु ।
सर्वबाधाः प्रशमय ।
सद्बुद्धिं विवेकं शान्तिं च देहि ।
धर्ममार्गे नः प्रेरय ।
सर्वेषां कल्याणं भवतु ॥

21. आरती

विधि: घृत दीपक से माँ बगलामुखी की आरती करें। आरती के समय घंटी एवं शंख का प्रयोग अपनी परंपरा के अनुसार करें।
ॐ ह्लीं बगलामुख्यै नमः ॥

जय जय अम्बे जगदम्बे,
माँ बगलामुखि नमो नमः ।
पीताम्बरा परमेश्वरि,
माँ बगलामुखि नमो नमः ॥

नोट: स्थानीय/कुल-परंपरा में प्रचलित माँ बगलामुखी की आरती का पाठ यहाँ जोड़ा जा सकता है।

22. क्षमा-प्रार्थना

आवाहनं न जानामि न जानामि तवार्चनम् ।
पूजां चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वरि ॥

मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वरि ।
यत्पूजितं मया देवि परिपूर्णं तदस्तु मे ॥

23. देवी विसर्जन / उद्वासन

विधि: यदि आवाहन-विसर्जन की परंपरा अपनाई गई हो तो अंत में देवी से पुनः अपने स्थान पर विराजमान होने की प्रार्थना करें। विग्रह/चित्र का विसर्जन न करें; केवल आवाहित चैतन्य का उद्वासन/समापन भाव रखें।
ॐ ह्लीं बगलामुख्यै नमः ।
यथास्थानं प्रतिष्ठापयामि ।
पूजां गृहाण देवेशि पुनरागमनाय च ॥

24. अंतिम प्रणाम

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके ।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
॥ जय माँ बगलामुखी ॥

25. पंडित जी के लिए त्वरित पूजन क्रम

क्रम कार्य मुख्य पाठ
1 शुद्धिकरण एवं आचमन ॐ अपवित्रः पवित्रो वा...
2 दीप प्रज्वलन ॐ दीपज्योतिः परं ब्रह्म...
3 गणेश पूजन ॐ गं गणपतये नमः
4 गुरु स्मरण गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः...
5 संकल्प ममोपात्तसमस्तदुरितक्षयद्वारा...
6 कलश पूजन ॐ कलशस्य मुखे विष्णुः...
7 देवी ध्यान मध्ये सुधाब्धिमणिमण्डप...
8 आवाहन ॐ ह्लीं श्रीबगलामुख्यै नमः
9 षोडशोपचार पूजन आसन से नमस्कार तक
10 मंत्र-जप श्री बगलामुखी मूल मंत्र
11 अग्नि स्थापना ॐ अग्नये नमः
12 मुख्य हवन मूल मंत्र + स्वाहा
13 स्विष्टकृत् अग्नये स्विष्टकृते स्वाहा
14 पूर्णाहुति ॐ पूर्णाहुतिं समर्पयामि स्वाहा
15 आरती एवं क्षमा क्षमा-प्रार्थना
16 उद्वासन एवं शांति ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः

26. सामान्य प्रश्न

क्या इस विधि से घर पर बगलामुखी हवन किया जा सकता है?

यह पृष्ठ सामान्य सात्त्विक पूजन एवं हवन के क्रम के लिए है। विशिष्ट तांत्रिक अनुष्ठान के लिए गुरु-परंपरा का निर्देश आवश्यक है।

क्या मूल मंत्र की जप-संख्या निश्चित है?

सामान्य पूजा और दीक्षा-विशिष्ट साधना की जप-संख्या अलग हो सकती है। विशेष पुरश्चरण या अनुष्ठान की संख्या गुरु अथवा संबंधित पूजा-पद्धति के अनुसार निर्धारित करें।

हवन में किस मंत्र पर आहुति देनी है?

मुख्य हवन में स्वीकृत बगलामुखी मंत्र के अंत में “स्वाहा” के उच्चारण पर आहुति दी जाती है।

क्या तांत्रिक न्यास इस पेज में दिया गया है?

नहीं। दीक्षा-विशिष्ट न्यास एवं अन्य गूढ़ तांत्रिक प्रक्रियाएँ सामान्य सार्वजनिक पूजन-विधि से अलग रखी गई हैं।

॥ ॐ ह्लीं श्री बगलामुख्यै नमः ॥
माँ बगलामुखी सभी के जीवन में धर्म, विवेक, शांति, साहस एवं मंगल प्रदान करें।

॥ जय माँ बगलामुखी ॥
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